दिल की बात - दोस्ती पर कविता - दिल की बात

Saturday, 31 August 2019

दिल की बात - दोस्ती पर कविता





खुद को इतना भी मत बचाया कर,
बारिशें हो तोभीग जाया कर।

चाँद लाकर कोई नहीं देगा,
अपने चेहरे से जगमगाया कर।

दर्द हीरा है, दर्द मोती है,
दर्द आँखों से मत बहाया कर |

कामले कुछ हसीन होंठो से,
बातों-बातों में *मुस्कुराया कर।

धूप मायूस लौट जाती है,
छत पे किसी बहाने आया कर* |

कौन कहता है दिल मिलाने को,
कम-से-कम हाथ तो मिलाया कर!

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बेहतर से बेहतर कि तलाश करो,
मिल जाये नदी तो समंदर कि तलाश करो,
टूट जाता है शीशा पत्थर कि चोट से,
टूट जाये पत्थर ऐसा शीशा तलाश करो।